"महिला स्वास्थ्य सुरक्षा अभियान" -
आज हमारा देश विकासशील देशों की श्रेणी से निकलकर विकसितशील देशों की श्रेणी के तरफ अग्रसर है । यह हमारे राष्ट्र के लिए गौरव की बात है । हम सभी जानते हैं कि हमारा देश हिंदुस्तान पूरे विश्व में अपनी अलग रीति रिवाज तथा संस्कृति के लिए प्रसिद्ध है । भारत में प्राचीन काल से ही यह परंपरा रही है कि यहां महिलाओं को समाज में विशिष्ट आदर व सम्मान दिया जाता है । भारत वह देश है जहां महिलाओं की सुरक्षा एवं स्वास्थ्य का विशेष खयाल रखा जाता है । हमारा देश लगातार आधुनिक करण की तरफ तेजी से अग्रसर है । परंतु उसके बावजूद भी महिलाओं में पहले की अपेक्षा बढ़ते संक्रमण व स्वास्थ्य संबंधित समस्याएं चिंता का विषय है । ऐसे में यूबीएफ ह्यूमन सोशल वेलफेयर फाउंडेशन एक कुशल डॉक्टरों की टीम व कुशल समाजसेवी कार्यकर्ताओं की एक बेहतरीन प्रबंधन प्रणाली है जो राष्ट्र हित और मानव हित के लिए सदैव कित संकल्पित है । जो महिलाओं के महावारी (मासिक चक्र) स्वच्छता प्रबंधन हेतु "महिला स्वास्थ्य सुरक्षा अभियान"द्वारा एक अनोखी पहल की है । एक"नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे" के नतीजों के अनुसार संपूर्ण भारत मैं 20 प्रतिशत महिलाएं ही माहवारी के समय सेनेटरी पैड का इस्तेमाल करती हैं एवं समाज में लगभग 23% छात्राएं महावारी शुरू होते ही अपनी स्कूली शिक्षा छोड़ने पर मजबूर हो जाती हैं ।
तथा माहवारी के समय अस्वच्छता से अनेकों महिलाएं सर्वाइकल कैंसर से लेकर मृत्यु तक का कारण बन जाती हैं । आज महिलाओं में बढ़ते मासिक अनियमिता, बांझपन, बच्चेदानी में गांठ, माइग्रेन प्रॉब्लम, बालों का झड़ना, चिड़चिड़ापन और इन्फेक्शन जैसी न जाने कितनी बीमारियां चिंता का विषय है ।
ऐसे में यूवीएफ ह्यूमन सोशल वेलफेयर फाउंडेशन द्वारा नारी सर्व समाज को माहवारी के उपरांत गंदे कपड़े के इस्तेमाल से होने वाली बीमारियों की जानकारी प्रदान कर उन्हें जागरूक करने का काम कर रही है । जो पूर्णतया भारत सरकार द्वारा पंजीकृत है ।
यूपीएफ ह्यूमन सोशल वेलफेयर फाउंडेशन का उद्देश्य किसी धर्म विशेष नहीं बल्कि मासिक स्राव जैसी कुदरती घटना को समाज में स्वीकार्यता दिलाना है । जो प्रदेश के सभी जिलों में ब्लॉक स्तर से लेकर ग्रामीण स्तर तक के सभी वर्ग की महिलाओं का पंजीकरण कर स्वास्थ्य सुरक्षा हेतु सेनेटरी पैड उपलब्ध कराना है ।
स्वच्छ महिला, स्वस्थ्य महिला, सशक्त महिला, खुशहाल परिवार समृद्ध भारत बनाने की एक अनोखी पहल........
नारी को जब दोगे मान ।
तब होगा जग का कल्याण ।। महिला स्वास्थ्य हकदारी ।
पुरुषों की भी जिम्मेदारी ।।
"राष्ट्र हित में जारी"
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन
(WHO) के अनुसार दुनिया भर में हर साल प्रेगनेंसी या प्रसव के दौरान 2.8 लाख से ज्यादा महिलाओं की मौत हो जाती है । इसमें 99 फ़ीसदी मामले विकासशील देशों के सामने आते हैं । एक अनुमान के मुताबिक फिलहाल 95 लाख भारतीय हर साल रक्तदान करते हैं जो जरूरत के आंकड़े से करीब 30 लाख कम है । अगर देश की 1% आबादी भी ब्लड डोनेट करें तो खून की जरूरतों को आराम से पूरा किया जा सकता है ।
आइए हम सब मिलकर यूबीएफ ह्यूमन सोशल वेलफेयर फाउंडेशन से जुड़े और खून की जरूरतों को पूरा करने में अपना सहयोग दें जिससे किसी को जीवनदान मिल सके।
रक्तदान महादान
